18 वर्ष की यात्रा में अपने लक्ष्य की पूर्ति की ओर अग्रसर रहकर राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश, चण्डीगढ़ एवं दिल्ली में निवासरत अग्र वैश्य समाज के नागरिकों को अपने साथ जोड़ने में सक्षम साबित हुई है।